देश देशांतर में आज बात करेंगे सार्वजनिक संपत्ति को लेकर अधिकार और कर्तव्य की। कई बार अपनी बात को पहुंचाने के लिये शुरू किया गया विरोध प्रदर्शन, हिंसक हो जाता है जिसका नतीजा ये निकलता है कि सार्वजनिक संपत्ति को काफी नुकसान पहुचंता है। हाल ही की बात करें तो उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और असम के कुछ हिस्सों में इसी प्रकार की हिंसा देखने को मिली, जहाँ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमे ये समझने की सख्त जरूरत है कि इस तरह के प्रदर्शन न केवल लोक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, बल्कि टैक्स अदा करने वाले नागरिकों के धन का नुकसान होता है.. सरकार के खर्चों पर बोझ बढ़ता है, अशांति फैलती है और आमजन का जीवन प्रभावित होता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों को खुद से पूछना चाहिए कि क्या जो कुछ उन्होंने किया, वो ठीक था। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को बताना चाहते हैं कि वे यह न भूलें कि अधिकार और कर्तव्य दोनों महत्वपूर्ण हैं और वे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। तो आज जानने कि कोशिश होगी कि विरोध जताने के लिये क्यों सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाना जरूरी है..क्यों सार्वजनिक संपत्ति को लेकर हमें अपने कर्तव्यों का बोध नहीं होता. Anchor: Ghanshyam Upadhyay
Producer: Sagheer Ahmad
Guest Name: Prakash Singh, Former Director General of Police (DGP)
B. L. Vohra, Former DG Civil Defence
Dr. Rajiv Nanda, Senior Advocate, Supreme Court
Sushil Chandra Tripathi, Former Principal Secretary, Uttar Pradesh

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